दुनिया की रस्मों को छोड भी दिजिये
अब दिल की ही राह पकड कर चलिये
अपनी खुली सांस का असर है शायद
जो मुरझाये हुए फुल फिर महकने लगे|
Archive for February, 2010
दिल की ही राह पकड कर चलिये…
Posted in Hindi Poems (हिंदी कविता), Poems on February 25, 2010 | 1 Comment »


