सात साल…….


This has happened after a long time. A poem completed in a single flow within couple of days, did not take break of several days or months to finish half-complete poem. I could stay with the intensity of emotions in the same flow to complete the poem. I thoroughly enjoyed this painful yet rewarding process after a long time, not sure about the outcoem though. But here it is, for whatever it is worth!

couple-7-years

आज सात साल हो गये
पर जैसे कल ही की बात लगती है…

बाहर बारीश, दिल मे तमन्न्ना
भीगा, सहमा सा मै बेचारा
कुछ ख्वाब थे मेरे पलकों पर
और तुम इन सब से बेअसर

किसी मासूम बच्चे की तरह
सो रही थी तुम बेखबर
कुछ रिश्ता तो नहीं था जानम
और ख्वाब युंही बुन रहे थे हम

…….

आज सात साल हो गये
और ये अजीब सी बात लगती है…

आज बंधे है हम रिश्तो से
और बीच मे है ख्वाब बिखरे से
तुम हमसफर हो, हमराह मेरे
फिर क्यों है वो गीत अधुरे?

जिंदगी की ये कैसी मजबुरी?
साथ है हम तो क्यों है दुरी?
अनगिनत ये सवाल है,
और बेजु़बां सा मलाल है

…….

आज सात साल हो गये
और ये बात करना जरूरी है…

हमे किस खुशी की तलाश है?
सबकुछ तो अपने पास है
राहें जब खुबसुरत है
मंझिलो की क्यों जरुरत है?

आज फिर हाथ थाम लो
मेरे दिल की बात मान लो
साथ अगर हम मुस्कुरायेंगे
जवाब मिल ही जायेंगे!

© Manish Hatwalne
(2 & 3  October 2013)

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s